किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर" की कविताओं के ब्लोग में आपका स्वागत है।

किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



बुधवार, अप्रैल 07, 2010

दुल्हे बने कंडेक्टर

फेरे में दुल्हन को
देख दुल्हे बने
कंडेक्टर 
से नहीं गया रहा
उसने अपनी डयूटी
के अंदाज़ में ही कहा
तू तो मन्ने   
घणी ही भाएगी
पर थोड़ी और
सरकजा

एक सवारी
और आयेगी
किशोर पारीक " किशोर"

 

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना । आभार

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  2. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  3. wah pari ji kya bat he

    ye sahi vyang huwa na

    bahut khub

    badhai aap ko is ke liye


    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  4. भाई किशोर पारीक,
    मैँ आपके ब्लाग पर आया ,बहुत कुछ पढ़ा और बहुत कुछ पाया।
    आप तो हास्य व्यंग्य के धनी हैँ।आपके व्यंग्य की धार व हास्य की फुहार बहुत तेज है।मैँ तो सराबोर हो गया।मैँ भी कुछ कुछ करता हूं।आप मेरे ब्लाग पर पधारेँ! omkagad.blogspot.com

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  5. हा हा!! बढ़िया-आदत नहीं जाती!

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