किशोर पारीक "किशोर"

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किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



मंगलवार, मई 04, 2010

झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल मुस्कान छै

ढूंढाड़ी कवि बुद्धि प्रकाश पारीक को किशोर पारीक की काव्यांजलि


मायड भाषा मोन हुई अब, हुयो घणो नुकसान छै
झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल  मुस्कान  छै
 दीप भुज्यो ढूंढाड़ी को तो, सगळा ही हैरान छै
जेपर म्हांको कविवर थां बिन,  दीख रह्यो वीरान छै
थाने म्हें आकाश कहूं , या छाया  हालो दरख कहूं
आँख्यां सूं हरदम झरवालो, कविवर थांने हरख कहूं
संसद छ चोपाल काव्य की, ढूंढाड़ी की शान छै
झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल मुस्कान छै

धरम जात  अर पात ना  देखी, शब्दां की गंगा बांटी
बरसां- बरसां याद करेली, मरुधर की थाने मांटी
थासू   सिख्योडा सब टाबर, माँ रह्या अहसान छै
झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल अर मुस्कान छै

उत्तर दक्षिण पूरब पच्छिम, साईकिल सूं थे नांप धरया
आई साल दिसंबर मांहि, कवियां का सम्मान करया
आँख्यां ओट हुया थे गुरुवर, बिलखे राजस्थान  छै
झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल मुस्कान छै

शब्दां ने ले जांवा  आगे, थांका पूर्णविराम सूं
दयो थे आसिरवाद घणेरो, आज सुराग का धाम सूं
फेरूँ बनसी यांम  सूं ही, तुलसी अर रसखान   छै
झरता नेना नीर थम्या सब, गीत ग़ज़ल मुस्कान छै

किशोर पारीक " किशोर"

1 टिप्पणी:

  1. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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