किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर"

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किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



शुक्रवार, जून 24, 2011

ईश्‍वर तुल्‍य पिता को शत शत नगन है

मैं अंश हूं तुम्‍हारी स्‍नेहमयी अभिलाशा का

मैं वंश हूं तुम्‍हारे काव्‍यालय की आशा का
मैं अभ्रिव्‍यक्ति हूं तुम्‍हारी अनकही भाषा की
मैं अनुभूति हूं तुम्‍हारी हर परिभाषा की
मेरे चित्‍त पटल पर सब,सतरंगी चित्र तुम्‍हारे है
बाबू जी तुमरे बिन तो, ये कोरे कागज सारे हैं

मेरी थकन को शक्ति का सागर दिया,
तोतली जुबान को शब्दों का आगर दिया
मेरी गुस्ताखियां माफ करते रहे,
मेर हर अक्षर को, पैराग्राफ करते रहे
मैं अंश हूं तुम्हारी स्नेहमयी अभिलाषा का,
मैं वंश हूं तुम्हारी काव्यालय की आशा का
मेरी मुस्‍कुराहटों के तुम्‍ही तो हेतु हो
मेरी खुशियों की हाटों के तुम्‍ही तो सेतु हो
तुम ही धरती और तुम्‍ही हो अम्‍बर
मेरे तो तुम्‍ही ईश्‍वर तुम्‍ही हो पेगम्‍बर
मेरी हर पगडंडी तुम्‍हारी अनुगामी है
हर भटकाव पर तुम्‍ही ने अंगुली थामी है
पितृ ऋण से बडा ऋण हो नहीं सकता
कितना भी चुकाये पुत्र उऋण हो नहीं सकता
आप हैं तो ये खुशबू है, फूल है, चमन है
ईश्‍वर तुल्‍य पिता को शत शत नगन है
किशोर पारीक 'किशोर'

3 टिप्‍पणियां:

  1. sadhu sadhu...........kishorji !

    bahut bahut badhaai is anupam rachna ke liye.......

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  2. मेरे तो तुम्‍ही ईश्‍वर तुम्‍ही हो पेगम्‍बर
    मेरी हर पगडंडी तुम्‍हारी अनुगामी है
    हर भटकाव पर तुम्‍ही ने अंगुली थामी है
    पितृ ऋण से बडा ऋण हो नहीं सकता
    कितना भी चुकाये पुत्र उऋण हो नहीं सकता
    आप हैं तो ये खुशबू है, फूल है, चमन है
    ईश्‍वर तुल्‍य पिता को शत शत नगन है

    शत-शत नमन...
    सुंदर रचना...

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  3. BHAI SAHAB, NASKAR, BAHUT DINO BAAD AAJ KAYALOK KI SAIR KAR PAYA HU, AAP KO ITNI MAN KO CHU LENE WALI KAVITA KE LIYA HARDIK BADHAI

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