किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर" की कविताओं के ब्लोग में आपका स्वागत है।

किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



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बुधवार, अप्रैल 14, 2010

में तुझे देख लूँगा

एक गांव के  ऑफिस जाते पति को
आधुनिक पत्नी ने मारी
किस फ्लाईगं
कहा
सी यू इन ईवनिंग
सुनते ही
पति का चढ़ गया पारा
उसने भी जवाब दे मारा
धमकाती किसे हो
एक घुमा कर दूंगा
और तू मुझे क्या देखेगी
में तुझे देख लूँगा
किशोर पारीक " किशोर" 

तंग आया फरमाईशों से

भरपाया तेरी ख्वाईशों  से
तंग आया फरमाईशों से
इसलिए जा रहा हूँ
इस नरक से तरने
जा रहा हूँ मरने
पत्नी  रुंआसी होकर बोली
हे मेरे हमजोली
नेचर  है तुम्हारी जोली
बेशक आप जातें है जाईये
जाने से पहले एक सफेद
साड़ी दिलवाते जाईये
ये भावी विधवा
अंतिम समय कहाँ से लायेगी
आपकी अन्त्येष्टि में
यह साड़ी काम आएगी
किशोर पारीक "किशोर"

साइबर काऊ


ई- डेयरी खोल  कर
एक छोरा ले आया
साइबर काऊ
दूध लेने आया
गांव का ताऊ
छोरे ने हँसते हुए बोला
 ताऊ पेन ड्राइव लाओ
जितने जीबी दूध
चाहो ले जाओ
ताऊ भी था थोडा
कम्पुटर पढ़ा
उसने उसी अंदाज़ में
उत्तर जड़ा
फालतू मात बोल
कम्प्यूटर के वायरस
देने से पहले गायरस
ईं की जीभ दिखा
म्हें पहचाणु थारी
सगली पीढ़ी
कठे तने लगा रखी हो
पानी वाली सीडी
भाया तू यदी
कम्प्यूटर में डेस्कटौप है
तो यो ताऊ भी पूरो लेपटोप  है!
किशोर पारीक " किशोर"   

मंगलवार, अप्रैल 13, 2010

हज़ार हज़ार के नोटों की माला


हे माया
हज़ार हज़ार के नोटों की माला
देख चकराया 
तेरे जो रंगरूट है
उन्हें लूटने की छूट है
अमीर का अट्टहास  है
गरीब का उपहास है
भावनाओं  की ठगाई है
कमर तोड़  महंगाई है
असत्य के दाव   है
सत्य पे घाव है
 नोट पे गाँधी  है
पाप की आंधी है
माला नही नाग है
लोकतंत्र पे दाग है!
में तो तुझे तब मानता
तेरी असलियत पहचानता
जैसे फूलों की माला
अपने गले से उतारती थी
दलित को पहना कर  पुचकारती थी
क्यों नहीं किया अबके उनसे प्यार
क्यों नहीं डाला उनके गले में यह हार
हे माया
हज़ार हज़ार के नोटों की माला
देख चकराया
किशोर पारीक " किशोर"

गुरुवार, अप्रैल 08, 2010

लुगाई की तलाश

एक हफ्ते तो ढूंढता डोला
फिर जाकर पुलिस  को बोला   
अपनी गुहार कुछ यों लगाई
दरोगाजी मदद करो 
भाग गयी मेरी  लुगाई
दरोगा ने आँखें चलाते
जारी कर दिया फरमान 
नहीं रखता होगा तू
उसका ध्यान
पीड़ित बार-बार आहे भरता था
बोला दरोगाजी
में तो उसे आपनी
सगी बहन से भी ज्यादा
प्यार करता था !

किशोर पारीक " किशोर"
 

साजन एफ एम रेडिओ

निश-दिन तान सुनाये
मुझको  होले होले
अच्छी अच्छी बातें बोलें
जब चाहूं मुहं खोले
सुन सखी मुझको
ऐसे साजन की है
खोज
बोली सहेली, छोड़  तलाश पति की
जा एफ एम रेडिओ खरीद
उसे सुन रोज
मना मोज

किशोर पारीक"किशोर"

बुधवार, अप्रैल 07, 2010

दुल्हे बने कंडेक्टर

फेरे में दुल्हन को
देख दुल्हे बने
कंडेक्टर 
से नहीं गया रहा
उसने अपनी डयूटी
के अंदाज़ में ही कहा
तू तो मन्ने   
घणी ही भाएगी
पर थोड़ी और
सरकजा

एक सवारी
और आयेगी
किशोर पारीक " किशोर"

 

पॉपुलेशन नियंत्रण

इंडिया में
प्रति दस सेकंड
में एक औरत
एक छोरा
जनति है !
क्या करें आबादी
रोकने का तरीका 
बतावें 
छात्र ने उत्तर दिया 
सर ! सबसे  पहले ऐसी
लुगाई को ढूंढ़कर 
उसे सबक सिखावें !
किशोर पारीक " किशोर"

व्यंग: इच्छाधारी बाबा

नागनाथ ने सांपनाथ 
से कहा 
हम सिर्फ फिल्मों और 
कहानियों में रह गए 
अरे बाबाजी
हमारे नाम पर 
मजे ले गए 
किशोर पारीक " किशोर" 

हँसते हँसते मरो

बिजली के करंट से
मरा
मेरे गांव का एक
मसखरा
खम्बे से उतार कर 
उसकी लाश, जब
अर्थी पर
सजाई  गयी
उसकी मुख मुद्रा
हंसती हुई
पाई गयी!
यमराज ने
ऐंठ कर प्रश्न दागे
अबे ओ अभागे
ऐसा क्या ?
मरते हुए भी
हंसी उलीच रहा है
मसखरे  ने
मुस्करा कर कहा
यमराज जी मैंने सोचा
फोटोग्राफर
मेरी फोटो खिंच रहा है !
किशोर पारीक " किशोर"

पापा बनाम डेडी

मुझको तू पापा कहती थी
अब क्यों कहती "डेड"
इस परिवर्तन पर मेरा लाडो
घूम रहा है , हेड
घर अपना है,
बाग सरीखा
डेडी तुम हो माली
तुमको गर बोलूं पापा
तो पूछती होंटों  
की लाली ! किशोर पारीक " किशोर"

नेता सांप

नेता सांप
सोने पहुंचे वर्माजी,
बिस्तर में था इक नाग
बोले वर्मा डस नेता को,
और यहाँ से भाग ! 
बोला सांप छोड़िये बातें 
नेता अपना भाई है 
मेरे अन्दर की विष
की थेली
उससे ही भरवाई है !
किशोर पारीक "किशोर"

कबूतर के माध्यम से मिसकाल

कबूतर के माध्यम से मिसकाल

एक प्रेमी
जोड़ा
कबूतर के माध्यम से
संदेशो का सिलसिला
जोड़ा
एक  दिन प्रेमिका के
चाँद से चेहरे पर
उदासी की अमावस्या
छाई   थी
कबूतर तो आया था
एस एम् एस
नहीं लाया था
मिलने पर पूछा
कारण
प्रेमी ने कहा हे
मेरी चंपारण
ये ही तो मेरा कमाल  था
कपोत  के साथ
ये मेरा मिसकाल था !
किशोर पारीक " किशोर"

मंगलवार, अप्रैल 06, 2010

सरकारी अस्पताल

सरकारी अस्पताल

काव्य की कक्षा में
गुरूजी ने प्रश्न दागा
बताईये !
ज्यों-ज्यों दवा की 
रोग बढता ही गया 
समझाइये 
एक होशियार
चेले के उत्तर पर
पूरी कक्षा ने
मुस्कराहट मारी
बोला सर !
लगता है
जहाँ
इलाज चल रहा है,
वह अस्पताल है
सरकारी !
किशोर पारीक" किशोर"

लोन लेकर करो विवाह

लोन लेकर  करो विवाह

बैंक से लिया लोन
खरीदी
एक कार
नहीं चुका सका तो,
वापस ले गए
यार
काश   
ऐसा होता  पता
तो बिलकुल नहीं 
डरता 
शादी भी लोन लेकर ही 
करता 
 किशोर पारीक " किशोर"
  

गुरुवार, अप्रैल 01, 2010

बिन फेरे हम तेरे

पशु हार्ट अटेक से नहीं मरते
क्‍यों कि बो शादी नहीं करते
क्‍या आदमी उससे भी गया गुजरा हैं
शादी तो साक्षात दासता का पिंजरा हैं
महाराष्‍ट्र में लिव इन रिलेशन ने,
संबंधों पर मोहर लगाई हैं
बल्लियों उछल रहें हैं लाखों कुँवारे
यह बात उन्हें बहुत पसंद आई हे1
आदमी कुंवारा पैदा हुवा था,
कुंवारा ही जिये, कुँवारा ही मरे
जहां कही स्वादिष्ट चारा देखे,
वहीं चरे
अब भविष्‍य में शादी की क्‍या गरज
क्‍यू बिगड़ावे अपनी विगत
अब अनेक बुराइयों का होगा
दी एंण्‍ड
क्‍यों कि ना वाइफ होगी,
ना हसबेण्‍ड
पति, पत्‍नी और वो का चक्‍कर भी
दूर होगा ना लड़की मजबूर होगी
ना लड़का मजबूर होगा
लाफटर लतीफ़ों में कैसे
पत्नी को कोसेगें
कवि गीतों में कैसे
हास्‍य परोसेगें
घर घर सियासत की तरह
गठ बंधन होंगे
सत्‍ता सुख की तर्ज पर
गृह सुख मिल बांट खायेंगे
क्लेश हुवा तो फिर
अलग अलग हो जायेगें
जब मूढ़ हुवा तो
बिन फेरे हम तेरे
नहीं तो तू तेरे मैं मेरे
सबसे ज्‍यादा चिंता तो हमें
एकता कपूर की सता रही हैं

वो पठठी तो ज्‍यादातर
सास बहू के सिरियल ही बना रही हैं
अब बन्‍द हो जायेगा
सालियों का जूते छिपाना
भूल जायेगें सलमान का वो गाना
दीदी तेरा देवर दीवाना
हाय राम कुडियों को डाले दाना
अब बेटी के बाप को
चौरासी लाख योनियों के
संचित पाप को
बेटे के बाप
अर्थात पीवने सांप
के चरणों में पग़डी रखने की
नौबत नहीं आयेगी
आँखें भी आंसू नहीं बरसायेंगीं
न ही बिटिया दहेज़ के लिये
जलाई जायेगीं
लिव इन रिलेशन हेतु
अब कुण्‍डली नहीं
सेलेरी स्लिप की बात होगी
सुहाग रात प्रत्‍येक रात होगी
पिछले प्रेम संबंधों का नहीं होगा फेरा
एक के मरते ही दूसरे की जिंदगी में
फिर आयेगा नया अँधेरा
नया फूल देखकर तितलियां
गुनगुनायेगी
सुन्‍दर घाट देखते ही मछलियां
आशियाना वहीं बसायेगी
मियां बीबी राज़ी तो क्‍या करेगा काजी
जैसे नारे होंगे बहुतेरे
या गाने होंगे बिन फेरे हम तेरे
सेक्‍स, रोमांस, मोज-मस्ति,
हम तो नये जमाने की बात करतें हैं
सांस्‍कृतिक पतन, चरित्र हनन,
ये आप किस जमाने की बात करतें हैं।
किशोर पारीक " किशोर" 

गुरुवार, अगस्त 27, 2009

नेता जी का विवाह

नेता जी का विवाह
पक्‍की उमर के नेता ने
ब्याह रचाया
तो हमने
यह सवाल उठाया
हे मेरे देश की नाव के
तारनहार
इस उमर में
ये विवाह और प्‍यार
नेताजी ने भरी आह
कहने लगे
ये हैं मेरा है
मध्‍यावधि विवाह
आगे की बात सुन कर
हम रह गये दंग
कहने लगे
मेरा पहला विवाह
हो गया था भंग
किशोर पारीक"किशोर"

अँग्रेज़ी टाँग

अँग्रेज़ी टाँग

हमारी एक महिला मित्र
संस्कारित उनका चरित्र
अँग्रेज़ी टाँग तोड़ने की लत
बातों में कई बार बिगाड़ी गत
एक बार मेरे दोस्‍त की शिकायत
दर्ज कराती सुनाई दास्‍तान
किशोर जी आपका दोस्‍त
नहीं करता हमारा सम्‍मान
मैंने पूछा गुस्‍सा कब तक जताओगी
या यो ही बेचारे को बेवफा बताओंगी
बोली मैं उम्र में बड़ी हू इसी लिये
मुझे इस बात पर आती हैं रिस
रोज मिलता हैं लेकिन
कभी नहीं करता हैं किस
एक दिन टिकट विण्‍डो पर
उनका यह कहना
भाई साहब जरा
जरा चोमू का स्‍टेम्‍प देना
कभी रेल के डिब्‍बे
उनके शब्‍दों में बॉक्स हो गये
हमारे लिये मजेदार जोक्‍स हो गया
एक दिन हमारे घर आयी
घरवाली से मेरी तकरार उसे नहीं भाई
तो दुनियादारी की बातें हमें समझाई
पति पत्‍नी का संबंध
जैसे गुलाब में छिपी हो सुगंध
जीवन रूपी गाड़ी में
प्‍यार का इंधन भरे
थोड़ा टायलेट किशोरजी आप
थोड़ा टायलेट भाभी आप करें
एक दिन उसे परेशान देखा
चेहरे पर थी चिन्‍ता की रेखा
मैंने पूछा मेडम
क्‍या टेशन नजर आ रहा है
बोली सुबह से ही उदर में
  ! हेड़क सता रहा हैं

फटे होठों की दवाई


फटे होठों की दवाई
फटे होठों से परेशान
हमारी काम वाली
बाई
श्रीमती जी के पास
आई
बीबी जी प्‍लीज दे दो
कोई अच्‍छी सी दवाई  
पत्‍नी ने मजाक में कहा
इलाज हैं बस एक
किस
बड़ा ही इजी
बोल तेरे साजन को
वो किस काम में
इतना बीजी
वेचारी बाई
किस का मतलब
नहीं समझ पाई
बोली बीबी जी
ये एहसान नहीं
भूलाउंगी
साहब को फोन कर दो
मैं सांझ को
आंउगी
  उन्हीं से
ले जाउंगी
किशोर पारीक "किशोर

चुनाव आ गये,

किसानों के कर्ज माफ
 चुनाव आ गये,
गाँव के मंचों पे
नेताजी छा गये
कहने लगे
नहीं होगी बिजली
कभी भी गुल,
और बनवा दूंगा में
नदी पर पुल,
एक वोटर
हँसते हुवे बोला
महोदय
आपका तो वास्‍तव में
कोई सानी नहीं हैं
सरकार
हमारे गांव की नदी में तो
बरसों से पानी नहीं हैं
दोस्तों आप
मत घबराओ,
देखो मुझे जितवाओं,
जैसे ही में
विधायक की शपथ लूगा,
मैं पुल के साथ
नदी भी बना दूंगा