किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर"

किशोर पारीक "किशोर" की कविताओं के ब्लोग में आपका स्वागत है।

किशोर पारीक 'किशोर' गुलाबी नगर, जयपुर के जाने माने कलमकार हैं ! किशोर पारीक 'किशोर' की काव्य चौपाल में आपका स्वागत है।



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शुक्रवार, जून 24, 2011

बरखा की प्रथम बूदों का स्‍वागत

बरखा की प्रथम बूदों का स्‍वागत


पहली बरखा का हुआ, मनभावन अहसास ।
लम्‍बे लधंन बाद ज्‍यों, होठों लगा गिलास ।।
टप टप बूंदो की सुनी, रिदम भरी पदचाप ।
तबले पर पडने लगी, ज्‍यों जाकिर की थाप।।
उस दिन वह थी साथ में, उपर से बरसात ।

हाल हमारे देख कर, छाता भी मुस्‍कात ।।
बिजली चमके साथ में, पवन मंचाये शोर ।
तन में मन में उठ रहे, यादों भरे हिलोर ।।
मेघदूत संग भेजती, सजनी यह सन्‍देश ।
सावन बीता जा रहा, बालम लोटो देश ।।
दूरंदेशी देखिये, बैइये की श्रीमान ।
बरखा पहले नीड़ का, कर डा़ला निर्माण।।

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गुरुवार, मार्च 31, 2011

भारत मॉ को चाहिये, विश्व कप का ताज़ !!


कंगारू हैरान है, सदमे मे है पाक ! 
भारत की अब जम गयी, जग मे तगडी धाक !!

मोहाली तो जीत ली, अब मुम्बई की जंग !
श्रीलंका को हम वहाँ, खूब करेंगे तंग !!

चोंको छ्क्को से करो, फाइनल का आगाज़ !
भारत मॉ को चाहिये, विश्व कप का ताज़ !!

धोनी की दादी कहे, इतराती मुस्काय

यारों तुमने पाक की, तोड़ी भुजा मरोड़ !

अब किशोर उस जोश से, दो लंका गढ़ तोड़!!
आक्रमण करना भारी,
मारना मार दुधारी

भज्जी, धोनी, नेहरा, तेदुलकर युवराज !
झपटो लंका टीम पर,ज्यों चिड़िया पर बाज़ !!
प्रतिष्ठा की तुम सोचो,
टीम की टीम दबोचो

चुस्ती, फुरती, एकता, बहा स्वेद भरपूर !
लेकर आओ विश्व कप, तुमसे दो पग दूर !!
बज़रबट्टू छुडवांएं
सभी मिल जश्न मनाएँ

रखना गेंद गिरफ्त में, चौका धरो सतोल !
एक एक रण का यहाँ, है लाखों का मोल !!
नहीं लंका हो हाबी
करो तुम ताले चाबी

गया तिलक माला छुटी, रटे न राम-रहीम !
भेजे मैं कुछ रन बसे, छक्के बसे असीम !!
रही धोनी से आशा
सचिन पलटेगा पासा

धोनी की दादी कहे, इतराती मुस्काय !
पोता लाए विश्व कप , उसमे पीउ चाय !!
सौ के दर्ज़न वाला,
लगा रखूँगी ताला

किशोर पारीक "किशोर"

बुधवार, जनवरी 12, 2011

लोहड़ी की खिचड़ी

लोहड़ी की खिचड़ी


खिचड़ी तहरी हो गयी, खाने लगे पुलाव
अब लोहड़ी पर है नहीं, पहले जैसा चाव

खिचड़ी का फिर क्यों भला, उतरे मुह में कौर
जब पिज्जा से फास्ट फ़ूड, मिलते चारों और

पान मसाले फांकती, गुटकों की सौगात
त्योंहारों पर खिचड़ी, करते कैसी  बात ?

गर खिचड़ी भी हो गयी, पञ्च सितारा ब्रांड
न्यू जनरेशन खायेगी, मिला मिला कर खांड

क्या खाए खिचड़ी भला, महंगाई के भाव
चावल चीनी दाल  सब,  देते हमको घाव

खिचड़ी के हमने सुने, होते चारों यार
दही, घिरत, या गुड रहे, मिर्चीदार अचार
किशोर pareek " किशोर"

सोमवार, अक्टूबर 25, 2010

दिवाली के दोहे

दिवाली के दोहे

लक्ष्मी काकी आ जरा, दिखला अपना खेल
महलों को अब छोड़ दे, आ बस्जा खपरेल

दीपमालिका मिले, हमें बहुत ईमेल
नहीं फूल अपनत्व के, नहीं प्यार की बेल

बहियों की पूजा हुई, लुप्त कभी की यार
कम्पुटर की डिस्क पर, लेखे जो तैयार

लाखों की आतिश से, एक  दिया है श्रेष्ठ
कुछ लम्हों देता रहा, उजियारा यथेस्ट 

सूखे मेवे दे रहे, अब उनकी औकात
खील बताशों में कहाँ, अब पहले सी बात

रंगोली और मांडने, अब ना बनते मित्र
बिटिया लाई मोल से, चिपकाये कुछ चित्र

लक्ष्मी आयी चीन से, ले गणेश को  साथ
दीपोत्सव पर इस दफा, रहा कुम्हार उदास

दीपावली पर दें उन्हें, पलकों की दो बूँद
धरती माँ की गोद में, खोये आँखे मूँद

किशोर पारीक "किशोर"

सोमवार, सितंबर 20, 2010

अवधपुरी फिर से हुई, दौजख वाला द्वार,

अवधपुरी फिर से हुई, दौजख वाला द्वार,
चाहे किसकी जीत हो, चाहे किसकी हार

निर्णय चाहे जो रहे,  हारेगा यह देश
राजनीती के मोलवी, पंडित वाला वेश

शाला खोलो एक यहाँ,  मत दो अपनी  जान
मंदिर-मस्जिद से बड़ी,किलकारी मुस्कान

बुधवार, सितंबर 15, 2010

गंगां कोमानवेल्थ की, धोये सबने हाथ

दो मोसम है और भी, सूखा बाढ़ अपात
केवल ऋतुएँ हैं नहीं, सर्द , गर्म, बरसात
ये जब भी आते , अफसर हैं हर्षाते

संसद तो इनके लिए,     केवल एक दूकान
वन्दे मातरम की जगह, धन दे मातरम गान
जनता की दुश्वारी, चाहिए वेंतन भारी

गंगां कोमानवेल्थ की, धोये  सबने हाथ
बचों खुचों को दे रही, यमुनाजी सौगात
भर गए इनके गल्ले, हो गयी बल्ले बल्ले

स्टेडियम बन रहे, अरबों में तैयार
आफ्टर कोमानवेल्थ के , क्या होगा भरतार
लगेंगे फिर नहीं मेले, गधों के बने तबेले

किशोर पारीक "किशोर"

सोमवार, अगस्त 23, 2010

सफल सूत्रधार बनाने के सूत्र - ३

सफल सूत्रधार बनाने के सूत्र - ३
ईश्वर का वरदान है, आपनी ये आवाज
कर रियाज इसमे भरें, नए नए अंदाज़
आपनी पिच पहचाना , फिर करना आगाज़
पूरा बोले व्याक्य को, इक सी रख आवाज़
ट्विंग ट्विस्टर ले कंठ में, रट ले कुछ संवाद
नव रस में तू बोल कर, नाद ब्रह्म को साध
नाट्यकार के गुण पकड़, स्वर का कर अभ्यास
चिट्टा को रख एकाग्र तू, ला थोडा परिहास
नित्य नियम तू मानले, वाणी का अभ्यास
नए ध्यान की भूक रख, नए ज्ञान की प्यास
कर अपनी आलोचना, सुन खुद की आवाज
ज़ज बनकर कर फैसला, यही मंच का राज़
 ना बनना अमिताभ तू,ना ही तू इकराम
नक़ल छोड़ खुद का बाना, आपना एक मुकाम

किशोर पारीक" किशोर"

सफल सूत्रधार बनाने के सूत्र- 2

सफल सूत्रधार बनाने के सूत्र- 2
कार्यक्रम सागर हुआ, मंच हुआ जहाज
संतुलन बिगड़े नहीं, एन्कर का है काज
सजक, सृजन, सद्भावना, सरल स्वाभाविक सोच
शब्दों से जादू भरे, ओर वाणी में लोच
समझ इशारे आँख के, संयोजक पर दे ध्यान
बाकी के निर्देश पर, चाहे मत दे कान
 माईक के वोल्यूम की, पहले करले जाँच
सहज शांत ओर धेर्य रख, ना जल्दी में नाच
शब्द शब्द को तोलना, फिर होंटों को खोल
जहाँ कहीं हो बोलना, उनकी भाषा बोल
दीप प्रज्वलन पूर्वे ही , जांचो बाती घृत
कलाकार का पूर्वे ही, पढलो  जीवन वृत
कौन कहाँ  कब बोलना,  तय कर लेना मित्र
जोड़ी से रचने पड़ें, यदी मंच के चित्र
आयोजक के कम करें, वक्ता प्रस्तुति गान
चापलूस अच्छा नही, संचालक श्रीमान
आपना गला बचाईये, चिकना ना आचार
अति शीतल को टालिए , सिमित हो आहार
स्वांसों का अभ्यास कर , प्रानायण   जप ध्यान
आपने स्वर को साधलें, नित्य भ्रामरी ध्यान
किशोर पारीक" किशोर"

रविवार, मार्च 28, 2010

होली पर दोहे

होली पर दोहे
गुल तितली से यों कहे, कैसे खेलूँ फाग
भ्रमरों ने की ज्यादती, लूटा सभी पराग

हीरा पन्ना दिल हुआ , तन जैसे पुखराज
नैना नीलम दे रह, नवरतनी अंदाज

देख रूप उनका हुआ, मैं होली पर दंग  
चेतन से मैं जड़ हुआ, माँ में बजी मृदंग

तट ने पूछा दूर से, टापू क्या है बात
जातीं लहरें दे गयी, चुम्बन की सौगात

प्रियतम के संकेत पर,ज्यों ही खोला द्वार
जाना कुछ ही देर में, महंगी थी मनुहार

काज़ल बोला आँख से, तुम हो पानीदार
मेरी सांगत कर बनो, तीखी कुटिल कटार

गली गरारे गोरियां, नहीं गोप नहीं फाग
गीतों में झरता न अब, पहले सा अनुराग

कृतिकार  और लेखनी, कव्यलोकी मंच
गीत ग़ज़ल ले दोड़ते, शब्दों के सरपंच


  

सोमवार, जुलाई 06, 2009

बारिश के दोहे

हे ईश्‍वर किस बात की, अब करता है दैर
कब बरसेगी बादली, कब से धैर धुमेर ।।

कब से रटती मोरनी, पीहू पीहू दिन रात
साजन दे उपहार में, आँसू की सौगा़त।।

बजट बरस कर रह गया, प्‍यासा फिर भी गांव
वाह मुखर्जी खूब दी, तुमने हमको छांव ।।